यीसु के फेर से आना

 

लगभग 2,000 से अधिक बछर से संसार भर म अधिक से अधिक लोग मन यीसु मसीह के सुसमाचार ल सुनत हवयं | कलीसिया हर बढ़त हवय | यीसु हर वादा करे हे कि संसार के अंत म ओहा वापिस आही |फेर अभी ले ओहा वापिस नइ आय हे, लेकिन ओहा अपन वादा ल पूरा करही

जबकि हमन यीसु के वापिस आय के इंतजार करत हन, त परमेसर हर  चाहत के कि हमन ल ऐसे जीवन जीना हे जेहर ह पवितर हो अउ परमेसर ल आदर देने वाला हो | ओहा ये भी चाहत हे कि हमन एक दुसर ल भी ओकर राज्य के बारे म बतइ | जब यीसु हर ये धरती म रहिस त ओहा कहे रहिस “मोर चेला मन दुनिया म हर जगह लोग मन ल परमेसर के राज्य के बारे सुभ समाचार के परचार करहीं अउ फेर अंत आ जाही |”

बहुत अकन जाति के लोग मन अभी ले यीसु के बारे म नइ सुने हें | सरग म वापिस जाय से पहले, यीसु हर मसीही मन ल कहिस कि ओमन अइसन  लोग मन ल सुभ समाचार सुनावयं जउन एला कभू न नइ सुने हें | ओहर कहिस, “ जावव अउ सब जाति के लोग मन ल चेला बनावव” अउ “खेत हर लुये बर पाक के खड़े हवय”  

यीसु हर ये भी कहिस, “एक सेवक ह अपन स्वामी ले बड़े नइ होवय | जइसने ये संसार के लोग मन मोला बैर करिन, वइसने ओमन तुमन ल भी मोर कारन सताहीं अउ मार डाल्ही | फेर भी ये संसार म तुमन ल दुःख भोगना पड़ही, लेकिन हिम्मत रखव मैं हर सैतान ल जउन हर ये संसार म राज करथे ओला पराजित कर देय हंवव  | यदि तुमन अंत तक मोर प्रति वफादार रइहा, त परमेसर तुमन ल बचाही |”    

जब जगत के अंत होही त लोग मन के साथ का होही ओकर बारे म यीसु हर अपन चेला मन एक कहानी सूनाइस | ओहर कहिस, “एक झन मइनसे हर अपन खेत म अच्छा बीज ल बोइस | पर जब ओहा सूतत रहिस त ओकर बैरी हर आके गेहूं के बीच म जंगली बीज ल बोंके चल दीस  

जब अंकुर निकलीस त ओ मइनसे के सेवक मन ओला कहिन, ‘स्वामी, आप मन तो ओ खेत म अच्छा बोय रहा | त फेर एमां जंगली दाना कहाँ ले आगे?’ स्वामी हर उत्तर दीस ‘कोई बैरी हर येला बोय होही |’     

“सेवक मन स्वामी ल उत्तर दे के कहिन ‘का हमन जाके पौधा ल उखाड़ दी?’ स्वामी हर कहिस ‘नहीं’ | अगर तू मन अइसन करे जाहा त तुमन गेहूं के पेड़ ल घलो उखाड़ दीहा | लुए के बेरा तक अगोर लेवा अउ फेर जंगली पौधा ल इकठ्ठा कर जलाय बर एक जगह कुड़हो दीहा, लेकिन गेहूँ ल मोर कोठी म धर दीहा |”

चेला मन कहानी के अरथ ल नी समझ पाइन, एकरसेती ओमन यीसु ल एला समझाय बर विनती करिन | यीसु हर कहिस “जउन मइनसे हर अच्छा बीज बोवइया रहिस ओहर मसीह कस(प्रतिनिधि) ये | संसार हर खेत कस(प्रतिनिधि) ये | अउ अच्छा बीज हर परमेसर के राज्य के लोग मन कस (प्रतिनिधि) ये |      

जंगली दाना हर ओ मइनसे यें जउन मन दुष्टता करत रथें | जउन बैरी हर जंगली बीज बोइस ओहर सैतान ये | लूआई हर संसार के अंत ये | अउ फसल लुओइया मन परमेसर के दूत मन यें |”

जब संसार के अंत होही, त जउन लोग मन सैतान के हें ओ जम्मो झन ल सरगदूत मन एक साथ इकठ्ठा करहीं अउ ओमन ल एक धधकत हुए आग म डाल दिहीं, जिहाँ ओमन भयंकर पीड़ा के कारन रोहीं अउ अपन दांत ल पीसहीं | तब धरमी लोग मन अपन पिता परमेसर के राज्य म सूरुज के समान चमकहीं |

 

 यीसु हर ये भी कहिस कि ओहा संसार के अंत के ठीक पहली धरती म वापिस आही | ओहा वइसनेच वापिस आही जइसने ओहा इहां से गेय रहिस, मतलब ओकर एक भौतिक सरीर होही अउ ओहा आकास म बादल म वापिस आही | जब यीसु वापिस आही त हर मसीही जउन मर गे हवयं ओमन मरे हुए म से जी उठहीं अउ आकास म ओकर से मिलहीं |

    

तब जउन मसीही ओ समय म जीवित रहीं ओमन आकास म ऊपर उठहीं अउ जउन मन मरे हुए म से जी उठे रहीं ओ मसीही लोग मन के संग येमन भी मिल जाहीं | अउ ओ सब मन उहाँ यीसु के साथ रहीं | ओकर बाद, यीसु पूर्ण सांति अउ एकता म अपन लोग मन के साथ रही |

यीसु हर वादा करे हे कि हरेक ओ मइनसे जउन हर ओकर ऊपर विसवास करे हे ओला जीवन के मुकुट मिलही | ओमन हमेसा पूर्ण सांति म परमेसर के संग रहीं अउ राज्य करहीं | 

परन्तु जउन मन यीसु पर विसवास नइ करहीं, परमेसर हर ओमन मन म के हरेक झन के न्याय करही |ओहा ओमन ल नर्क म फेंक दीही, जिहाँ ओमन दुःख म हमेसा रोहीं अउ दांत पिसहीं | ओ आग हर कभू नइ बुझाय ओमन ल हमेसा जलात रही अउ कीड़ा मन ओमन ल हमेसा खात रहीं |   

जब यीसु हर वापिस आही त ओहर सैतान ल अउ ओकर राज्य ल हमेसा के लिए नष्ट कर दीही | ओहर सैतान ल नरक म डाल दीही जिहां ओहर ओ लोग मन के संग हमेसा जलत रही, जउन मन परमेसर के आज्ञा ल माने के बजाय सैतान के बात ल माने के चुनाव करे रहिन |

काबरकि आदम और हव्वा मन परमेसर के आज्ञा के उलंघन करिन अउ ये दुनिया म पाप ल लानिन, एकरसेती परमेसर हर ये दुनिया ल श्राप दे दीस अउ एला नष्ट करे के निर्णय लीस | लेकिन एक दिन परमेसर हर एक नवा आकास अउ एक नवा धरती के रचना करही जउन हर सिद्ध होही |

यीसु अउ ओकर लोग मन नवा धरती म रहीं अउ जो कुछ उहाँ पाए जाही ओकर ऊपर हमेसा के लिए राज्य करहीं | ओहर हरेक के आँसू ल पोंछही अउ फेर उहाँ दुख, उदासी, रोना, बुराई, दर्द, अउ मृत्यु नइ रहय | यीसु अपन राज्य म सांति अउ न्याय के साथ शासन करही, अउ ओहा हमेसा अपन लोग मन के साथ रही |

बाइबिल की ये कहानी म से लेय गये हे : मती 24: 14 ; 28: 18 ; यूहन्ना 15:20, 16: 33 ; प्रकाशितवाक्य 2: 10 ; मती 13 : 24-30 ; 36-42, थिस्सलुनीकियो 4 : 13-5 : 11; याकूब 1: 12 ; मती 22: 13 ’ प्रकाशितवाक्य 20: 10 , 21 : 1-22 ; 21

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